जब सब कुछ महंगा हो जाता है, पर कुछ ज़िंदगियां नहीं एक सच्चाई से भरी किताब है जो समाज के उस पहलू को दिखाती है जहाँ इंसानी ज़िंदगी की कीमत सबसे कम हो जाती है। यह ebook मेहनत, गरीबी, संघर्ष, बेरोज़गारी और उस सिस्टम की बात करती है जहाँ सब कुछ महंगा है—सपने भी—लेकिन कुछ लोगों की ज़िंदगी अब भी सस्ती समझी जाती है।
यह किताब उन आवाज़ों की कहानी है जो अक्सर सुनी नहीं जातीं। हर पन्ना एक सच्चा सवाल है, और हर शब्द एक आईना—जो हमें हमारे समाज की असली तस्वीर दिखाता है।
By: Digital Bookish Original
Available on: Freadio